सोचती हु उसे हर पल…
ना जाने दिल क्यों है बेसब्र…
जब होता है वो आँखों से ओझल…
धड़कने पंहुचा देती उसके पते पर…

कई बार सोचा भ्रम है वो, पाना नहीं है उसे…
मगर नादान दिल ने एक ना सुनी…
आज जब भी होता है उसका एहसास…
याद आती है बहुत सी बाते सुनी-अनसुनी…

दिल में थी बहुत सी बाते…
मगर कह ना पाई उसे…
नींदों में थे बहुत से सपने…
मगर बता ना पाई उसे…

कई बार सोचा, कह दु उसे की क्या है वो…
मगर हिम्मत ने साथ छोड़ दिया…
आज जब सोचती हु की क्या है वो…
तो ज़िन्दगी कहती है की एक खूबसूरत एहसास है वो…
एक खूबसूरत एहसास है वो…

Deepali Jain