आज फिर बादलों में काली छठा नज़र आई,

हवाओ ने मौसम में ठंडक सी भर दी…

गीली मिटटी की सौंधी-सौंधी खुशबू आई,

आज फिर बारिश ने दहलीज़ पर दस्तक दी…

बारिश की बूंदों से धरती भीग गई,

गर्मी की तपिश कम हुई और ठंडक का एहसास हुआ…

ना जाने क्यों आज दिल में ख़ुशी सी छा गई,

आज फिर से बारिश में भीगने का मन हुआ…

खेत-खलियानों में हरियाली सी छा गई,

पेड़ पौधों को जीने की वजह मिल गई…

चाय की चुस्की से पुरानी यादे ताज़ा हो गई,

आज फिर से ज़िन्दगी जीने की इच्छा हो गई…

सोचा, काश ये मौसम ऐसा ही रहे,

ऐसा समां यूँ ही बंधा रहे…

ना जाने क्यों आज मौसम ने ख़ुशी सी भर दी,

आज फिर बारिश ने दहलीज़ पर दस्तक दी…

आज फिर बारिश ने दहलीज़ पर दस्तक दी…