लिखने चली कागज़ पर तो समझ ना आया क्या लिखू…
ज़िन्दगी समझने चली तो नासमझ बन गई…
सोचा ज़िन्दगी को उतार दु कागज़ पर…
शब्द तो बहुत थे मगर शाई कम पड़ गई…

Deepali Jain