खुदको ढूँढने निकले तो किस्मत ने अपने जैसे औरो से मिलवा दिया…

कुछ बनने निकले थे तो  रूकावटो से नाता जुड़ गया…

मंजिल को पाने की चाहत में अपनों का साथ छुट गया…

तकदीर बनाने निकले थे मगर पता ही ना चला कब इस भीड़ ने खुद से ही अनजान बना दिया…

Deepali Jain